नाम से नहीं, काम से पहचान बनाने निकला एक जुझारू युवा – अनुराग यादव

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प्रतापगढ़। कुछ लोग हालात के आगे झुक जाते हैं, और कुछ लोग हालात को ही अपनी ताकत बना लेते हैं। तहसील रानीगंज के ग्राम कोठियाही (पोस्ट दिलीपपुर) के युवा अनुराग यादव इसी दूसरी श्रेणी के इंसान हैं – जो नाम से नहीं, बल्कि अपने काम और किरदार से अपनी पहचान बना रहे हैं।

“गढ़ के गौरव” श्रृंखला में आज बात एक ऐसे होनहार युवा की, जिसकी सबसे बड़ी पूँजी उसकी मेहनत, उसकी ईमानदारी और उसका सलीका है।

अनुराग यादव को जानने वाले एक बात जरूर कहते हैं – यह लड़का बेहद मेहनती है। किसी भी काम को वे पूरी लगन और बारीकी से, हर पहलू को ध्यान में रखते हुए करते हैं। काम चाहे छोटा हो या बड़ा, उसे अधूरा या लापरवाही से छोड़ देना उनके स्वभाव में नहीं है। यही सलीका और समर्पण उन्हें उनकी उम्र के बाकी युवाओं से अलग बनाता है।

मदद के मामले में तो अनुराग हमेशा एक कदम आगे रहते हैं। किसी की परेशानी सामने आए, तो वे पीछे नहीं हटते। और उनकी सबसे खास बात यह है कि जो काम या सेवा उनके अपने बस के बाहर भी हो, तब भी वे हाथ खड़े नहीं करते ब-ल्कि यह रास्ता जरूर बता देते हैं कि वह काम कैसे और कहाँ से पूरा हो सकता है। किसी जरूरतमंद को खाली हाथ लौटा देना उन्हें मंज़ूर नहीं।

तहज़ीब और अदब उनके मिजाज़ का हिस्सा है। बड़ों का आशीर्वाद लेकर और छोटों को साथ लेकर चलना – यही उनका तरीका है। यही संस्कार उन्हें हर उम्र और हर वर्ग के लोगों में प्रिय बनाते हैं।

अनुराग अपने इरादों को अपने ही शब्दों में बयाँ करते हैं। उनकी लिखी पंक्तियाँ उनकी सोच का आईना हैं –

“नाम से नहीं, अपने काम से पहचान बनानी है,
हर मुश्किल से लड़कर अपनी नई कहानी लिख जानी है।”

उनका सपना किसी दौलत या शोहरत का नहीं, बल्कि इतना सा है कि उनकी मेहनत रंग लाए और उनके माँ-बाप के चेहरे पर मुस्कान आए। वे मानते हैं कि एक दिन दुनिया उनके नाम को नहीं, बल्कि उनके किरदार को सलाम करेगी।

ऐसे मेहनती, ईमानदार और संस्कारी युवा ही किसी क्षेत्र की असली ताकत होते हैं। अनुराग यादव जैसे नौजवान इस बात का प्रमाण हैं कि प्रतापगढ़ का भविष्य मजबूत हाथों में है।

— प्रतापगढ़ पत्रिका | श्रृंखला : गढ़ के गौरव

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