प्रतापगढ़। गाँव की गलियों में आज भी एक नाम बड़े अपनेपन से लिया जाता है – सूर्य प्रकाश तिवारी। सभासद हैं, पर लोग उन्हें “साहब” कहकर नहीं, अपने घर का आदमी समझकर बुलाते हैं। और शायद किसी जनप्रतिनिधि के लिए इससे बड़ा सम्मान कुछ और हो भी नहीं सकता।
अक्सर देखने में आता है कि थोड़ा सा पद और अधिकार मिलते ही इंसान बदल जाता है – जो कल तक चौपाल पर सबके बीच बैठता था, वही धीरे-धीरे जनता से दूर होता चला जाता है। लेकिन घाटमपुर के सभासद सूर्य प्रकाश तिवारी इस सोच को पूरी तरह गलत साबित करते हैं। कुर्सी मिली, जिम्मेदारी बढ़ी, पर इंसान वही रहा – उतना ही सरल, उतना ही सहज और उतना ही विनम्र, जितने वे पहले थे।
“गढ़ के गौरव” श्रृंखला में आज बात एक ऐसे जनप्रतिनिधि की, जिनकी असली पहचान उनके पद से नहीं, बल्कि उनके व्यवहार और सेवा-भाव से बनी है।
सूर्य प्रकाश तिवारी एक बेहद साधारण जीवन जीते हैं – न कोई दिखावा, न कोई घमंड। जिस दौर में लोग जरा सी ताकत पाकर आम आदमी को कुछ नहीं समझते, उसी दौर में तिवारी जी आज भी “जनसेवा ही परमधर्म है” – इसी भावना के साथ लोगों के बीच डटे हुए हैं। यही सादगी उन्हें बाकी सबसे अलग और खास बनाती है।
हमारी टीम जब घाटमपुर पहुँची और वहाँ के आम ग्रामीणों से बात की, तो एक बात हर किसी की जुबान पर थी – उनके दरवाजे पर जो भी पहुँचता है, चाहे बड़ा हो या छोटा, बिना संतुष्ट हुए और बिना अपनी समस्या का समाधान लिए वापस नहीं लौटता। हर किसी के लिए उनका दरवाजा हमेशा खुला रहता है, और यही अपनापन गाँव के लोगों को उनसे जोड़े रखता है।
ग्रामीण यह भी बताते हैं कि कई बार जो काम उनके अधिकार-क्षेत्र से बाहर होता है, उसके लिए भी वे पूरी शिद्दत से जूझते हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ आम आदमी तक पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। किसी जरूरतमंद तक उसका हक पहुँचा देना उनके लिए महज एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सच्चा सुकून है।
गाँव की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी समस्या हो, सूर्य प्रकाश तिवारी हर मौके पर जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े मिलते हैं। दिन हो या रात, जब भी किसी को उनकी जरूरत पड़ी, वे कभी पीछे नहीं हटे। शायद यही वजह है कि घाटमपुर की जनता उन्हें केवल एक सभासद नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य मानती है।
एक सच्चे जनप्रतिनिधि की यही तो पहचान है – पद की ऊँचाई पर पहुँचकर भी जमीन से जुड़े रहना। और सूर्य प्रकाश तिवारी इसी बात की जीती-जागती मिसाल हैं।
— प्रतापगढ़ पत्रिका | श्रृंखला : गढ़ के गौरव

