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नई दिल्ली/श्रीहरिकोटा। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में शनिवार को एक सुनहरा अध्याय जुड़ गया। हैदराबाद की निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के रॉकेट 'विक्रम-1' ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से उड़ान भरकर सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचने का कारनामा कर दिखाया। यह पहली बार है जब किसी भारतीय निजी कंपनी का रॉकेट पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस ऐतिहासिक मिशन को 'आगमन' नाम दिया गया था। चार चरणों वाले इस रॉकेट ने उड़ान भरने के करीब 15 मिनट बाद लगभग 450 किलोमीटर की कक्षा में अपने उपग्रह स्थापित कर दिए। मिशन में दो छोटे उपग्रह भेजे गए।
इस उपलब्धि के साथ भारत उन गिने-चुने देशों की सूची में शामिल हो गया है जहां निजी कंपनियां भी कक्षा तक रॉकेट भेजने की क्षमता रखती हैं। प्रधानमंत्री समेत देशभर से कंपनी की टीम को बधाइयां मिल रही हैं।
खास बात यह है कि स्काईरूट की स्थापना 2018 में हुई थी — महज कुछ वर्षों में एक भारतीय स्टार्टअप का रॉकेट अंतरिक्ष तक पहुंचना देश के युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है। जानकारों का मानना है कि इस सफलता से भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग में निवेश और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे — जिसका लाभ छोटे शहरों और जिलों के प्रतिभाशाली युवाओं को भी मिलेगा।

